दैनिक आचरण भोपाल
समाचार
महर्षि महाविद्यालय मै करोड़ों के कथित घोटाले के आरोप, जॉइंट खाते से छात्राओं की राशि निकासी का दावा।
भवन से लेकर इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल, मान्यता निरीक्षण और छात्रवृत्ति तक उठे गंभीर सवाल।
भोपाल स्तर से कार्रवाई की उम्मीद
शिवपुरी। जिले के महर्षि महाविद्यालय को लेकर एक के बाद एक गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
डीएलएड और बीएड की छात्राओं की राशि जॉइंट खाते के माध्यम से निकाले जाने,
₹100 के स्टांप पर नोटरी कराए जाने तथा कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी,
लेकिन मामला विद्यार्थियों के भविष्य और आर्थिक हितों से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा रहा है।
बताया जा रहा है ।
शिवपुरी डाइट के प्राचार्य के माध्यम से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं,
जिसके बाद अब मामले में भोपाल स्तर से कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
यदि दस्तावेजों में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
जॉइंट खाते से छात्राओं की राशि निकासी पर सवाल सबसे गंभीर सवाल यह है कि डीएलएड एवं बीएड की छात्राओं के नाम अथवा उनसे संबंधित जॉइंट खाते के माध्यम से राशि की निकासी किस नियम के तहत की गई? राशि किसके द्वारा निकाली गई, कितनी राशि निकली और उसका उपयोग कहां हुआ—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
₹100 के स्टांप पर नोटरी क्यों?
महर्षि महाविद्यालय द्वारा ₹100 के स्टांप पर नोटरी कराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह प्रक्रिया किस नियम, आदेश या शासन के प्रावधान के तहत अपनाई गई,
इसका जवाब संबंधित अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन से मांगा जाना चाहिए।
कॉलेज की बिल्डिंग कहां है?
महाविद्यालय की वास्तविक भौगोलिक स्थिति और भवन को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
यदि कॉलेज विधिवत संचालित है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि उसका अधिकृत भवन कहां स्थित है
और वहां विद्यार्थियों के लिए कौन-कौन सी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल की भी हो जांच
विद्यार्थियों की इंटर्नशिप कहां कराई गई?
प्रैक्टिकल के लिए किन अधिकारियों या नोडल अधिकारियों ने निरीक्षण किया? उनकी निरीक्षण रिपोर्ट कहां है?
वर्ष 2026 में नवीन मान्यता से पहले किन अधिकारियों ने निरीक्षण किया और निरीक्षण में क्या पाया गया, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक किए जाने की
मांग उठ रही है।
गरीब छात्राओं की स्कॉलरशिप का हिसाब कौन देगा?
महाविद्यालय में पढ़ने वाली गरीब छात्राओं की छात्रवृत्ति को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी है। कितनी छात्राओं की स्कॉलरशिप स्वीकृत हुई, कितनी राशि जारी हुई, किस खाते में गई और उसका वितरण किस प्रक्रिया से हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए।
अब सवाल प्रशासन की भूमिका पर भी है।
यदि पूरे मामले में कोई अनियमितता नहीं हुई है तो संबंधित दस्तावेज, निरीक्षण रिपोर्ट, मान्यता संबंधी रिकॉर्ड, इंटर्नशिप रिकॉर्ड और छात्रवृत्ति का पूरा हिसाब सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी,
लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए भोपाल स्तर से निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की मांग है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो और छात्राओं की राशि का पूरा हिसाब सामने आए।
बड़ा सवाल:
अगर व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुसार चली है, तो फिर भवन, इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल, मान्यता निरीक्षण और छात्रवृत्ति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने में देरी क्यों?
