दैनिक आचरण भोपाल
समाचार
करोड़ों की इमारत, दीवारों पर सवाल! CM राइज स्कूल में ठेकेदार के साथ प्रशासन पर भी उठे सवाल।
नई बिल्डिंग में दरारों ने बढ़ाई चिंता,
गरीब बच्चों के भविष्य की धरोहर पर गुणवत्ता का सवाल—जांच के घेरे में निर्माण व्यवस्था।
शिवपुरी। बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे।
सीएम राइज स्कूल शिवपुरी के भवन को लेकर अब निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिस भवन को विद्यार्थियों के भविष्य की मजबूत नींव माना जा रहा था,
उसी निर्माण के दौरान दीवारों में दिखाई दे रही दरारों ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के अनुसार भवन का काम अभी पूरी तरह पूरा भी नहीं हुआ है,
लेकिन निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई इमारत में इतनी जल्दी दरारें क्यों दिखाई दे रही हैं?
क्या निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की पर्याप्त जांच की गई थी?
ठेकेदार के साथ निगरानी करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल
निर्माण कार्य केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहता।
सरकारी निर्माण में संबंधित विभाग, तकनीकी अधिकारियों और निरीक्षण व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि निर्माण के दौरान गुणवत्ता में कमी हुई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने समय रहते इसे क्यों नहीं पकड़ा?
यदि अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था, तो भवन में दिखाई दे रही दरारों की स्थिति उनकी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज हुई या नहीं? निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच हुई या नहीं? सीमेंट, सरिया, कंक्रीट और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी है यह इमारत
सीएम राइज स्कूल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले बच्चों की भी होती है। ऐसे में यह भवन केवल ईंट-पत्थर और सीमेंट की संरचना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ी सार्वजनिक धरोहर है।
अगर निर्माण में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता की पुष्टि होती है, तो इसका असर सरकारी धन के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा के वातावरण पर भी पड़ सकता है।
सवाल जांच का है, आरोप तय करने का नहीं
दरारें दिखाई देना अपने आप में भ्रष्टाचार का अंतिम प्रमाण नहीं है। इनके वास्तविक कारण का पता स्वतंत्र तकनीकी जांच से ही लगाया जा सकता है। इसलिए मांग है कि भवन का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण कराया जाए और निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शे, मापदंड, भुगतान, निरीक्षण रिपोर्ट तथा उपयोग की गई सामग्री की जांच की जाए।
अगर जांच में ठेकेदार या किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है,।“करोड़ों की इमारत, दीवारों पर सवाल! CM राइज स्कूल में ठेकेदार के साथ प्रशासन पर भी उठे सवाल”
नई बिल्डिंग में दरारों ने बढ़ाई चिंता, गरीब बच्चों के भविष्य की धरोहर पर गुणवत्ता का सवाल—जांच के घेरे में निर्माण व्यवस्था
शिवपुरी। बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे सीएम राइज स्कूल शिवपुरी के भवन को लेकर अब निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस भवन को विद्यार्थियों के भविष्य की मजबूत नींव माना जा रहा था, उसी निर्माण के दौरान दीवारों में दिखाई दे रही दरारों ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के अनुसार भवन का काम अभी पूरी तरह पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई इमारत में इतनी जल्दी दरारें क्यों दिखाई दे रही हैं? क्या निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की पर्याप्त जांच की गई थी?
ठेकेदार के साथ निगरानी करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल
निर्माण कार्य केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहता। सरकारी निर्माण में संबंधित विभाग, तकनीकी अधिकारियों और निरीक्षण व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि निर्माण के दौरान गुणवत्ता में कमी हुई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने समय रहते इसे क्यों नहीं पकड़ा?
यदि अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था, तो भवन में दिखाई दे रही दरारों की स्थिति उनकी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज हुई या नहीं? निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच हुई या नहीं? सीमेंट, सरिया, कंक्रीट और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी है यह इमारत
सीएम राइज स्कूल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले बच्चों की भी होती है। ऐसे में यह भवन केवल ईंट-पत्थर और सीमेंट की संरचना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ी सार्वजनिक धरोहर है।
अगर निर्माण में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता की पुष्टि होती है, तो इसका असर सरकारी धन के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा के वातावरण पर भी पड़ सकता है।
सवाल जांच का है, आरोप तय करने का नहीं
दरारें दिखाई देना अपने आप में भ्रष्टाचार का अंतिम प्रमाण नहीं है। इनके वास्तविक कारण का पता स्वतंत्र तकनीकी जांच से ही लगाया जा सकता है। इसलिए मांग है कि भवन का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण कराया जाए और निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शे, मापदंड, भुगतान, निरीक्षण रिपोर्ट तथा उपयोग की गई सामग्री की जांच की जाए।
अगर जांच में ठेकेदार या किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ दीवारों की दरारों का नहीं है—सवाल यह है कि बच्चों के भविष्य के लिए बनाई जा रही इस इमारत की नींव कितनी मजबूत है?
If you want, I can:
�Explain the possible causes of cracks in new school buildings
�Describe steps for a technical investigation of construction defects
�Recommend measures to ensure quality in future public school constructions
जिम्मेदारी तय कर
नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ दीवारों की दरारों का नहीं है—
सवाल यह है कि बच्चों के भविष्य के लिए बनाई जा रही इस इमारत की नींव कितनी मजबूत है?
If you want, I can:
�Explain the possible causes of cracks in new school buildings
�Describe steps for a technical investigation of construction defects
�Recommend measures to ensure quality in future public school constructions
