दैनिक आचरण भोपाल
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
महाविद्यालय नहीं, फिर कैसे चल रहा D.El.Ed का खेल?
शिवपुरी। जिले में D.El.Ed महाविद्यालयों की मान्यता और संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महर्षि महाविद्यालय को भोपाल स्तर से मान्यता किस आधार पर प्रदान की गई और मान्यता देने वाले अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण के दौरान आखिर क्या देखा? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों और स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के अनुसार, महर्षि महाविद्यालय के बताए गए पते और उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है। आरोप है कि जिस स्थान पर महाविद्यालय संचालित होना बताया जा रहा है, वहां मौके पर महर्षि महाविद्यालय के बजाय मेवाड़ पैलेस संचालित दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि महाविद्यालय धरातल पर निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं है, तो उसे मान्यता देने से पहले स्थल निरीक्षण किस प्रकार किया गया?
इस मामले में शिवपुरी कलेक्टर से भी चर्चा की गई है। वहीं डायट के प्राचार्य खान से चर्चा किए जाने पर उनके द्वारा कथित रूप से यह बताया गया कि महर्षि महाविद्यालय धरातल पर दिखाई नहीं देता और बताए गए स्थान पर भौगोलिक स्थिति में मेवाड़ पैलेस संचालित है।
मान्यता देने वाले अधिकारियों से जवाब जरूरी
मामला केवल एक कॉलेज की मान्यता तक सीमित नहीं है। यदि दस्तावेजों में एक संस्था का पता दर्ज है और मौके पर कोई दूसरी गतिविधि संचालित हो रही है, तो निरीक्षण रिपोर्ट, भवन की उपलब्धता, विद्यार्थियों की पढ़ाई, इंटर्नशिप और अन्य मानकों की जांच पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब बड़ा सवाल यह है कि भोपाल स्तर पर मान्यता देने वाले अधिकारियों ने मान्यता प्रदान करते समय कौन-कौन से दस्तावेज और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट देखी? क्या स्थल का वास्तविक निरीक्षण हुआ था? यदि हुआ था तो निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज है?
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। प्रशासन यदि मान्यता संबंधी फाइल, निरीक्षण रिपोर्ट, भवन संबंधी दस्तावेज, विद्यार्थियों की उपस्थिति और इंटर्नशिप रिकॉर्ड की जांच कराए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
अब निगाहें प्रशासन और मान्यता देने वाले अधिकारियों के जवाब पर हैं—आखिर महर्षि महाविद्यालय को मान्यता देते समय धरातल पर क्या देखा गया था?
