दैनिक आचरण भोपाल
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शिवपुरी के सभी डीएलएड और बीएड संस्थानों में सेकंड ईयर की नियमित कक्षाएं कब से चल रही हैं?
शिवपुरी जिले के 11 डीएलएड–बीएड महाविद्यालयों की कक्षाओं पर सवाल: सेकंड ईयर की पढ़ाई कब शुरू होगी?
प्रशासन की चुप्पी के बीच महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटों ने बढ़ाई चिंता
शिवपुरी।
जिले में डीएलएड और बीएड संचालित करने वाले महाविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
खासतौर पर सेकंड ईयर के विद्यार्थियों की कक्षाएं, प्रशिक्षण, प्रायोगिक कार्य और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां समय पर संचालित हो रही हैं या नहीं—
इसकी प्रशासनिक स्तर पर निगरानी कितनी प्रभावी है, यह सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
मामला राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के रिकॉर्ड में दर्ज महर्षि महाविद्यालय, पोहरी/पोहरी रोड, शिवपुरी से जुड़ा होने के कारण और गंभीर हो जाता है।
NCTE की उपलब्ध सूची में शिवपुरी स्थित महर्षि महाविद्यालय के नाम पर D.El.Ed की 50 सीटें दर्ज हैं।
50 सीटें, लेकिन विद्यार्थियों की कक्षाएं कहां?
सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2026-27 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को लेकर है।
यदि 50 विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ है तो उनके लिए नियमित कक्षाएं किस भवन में संचालित हो रही हैं?
प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल, शिक्षण-अभ्यास, पुस्तकालय और अन्य अनिवार्य शैक्षणिक सुविधाएं वास्तव में कहां उपलब्ध हैं?
NCTE के रिकॉर्ड में शिवपुरी के महर्षि महाविद्यालय की अलग प्रविष्टि के साथ 50 सीटों का उल्लेख है, जबकि शाजापुर के Bercha Road स्थित है।
यही अंतर अब जांच का विषय बनता है
शिवपुरी संस्थान का वास्तविक परिसर, पता और शैक्षणिक गतिविधियां किस स्थान पर संचालित हैं।
मान्यता के समय किसने किया था भौतिक सत्यापन?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन अधिकारियों से है, जिन्होंने संस्थान की मान्यता अथवा संबंधित प्रक्रिया में निरीक्षण किया होगा।
क्या निरीक्षण के समय भवन मौके पर मौजूद था?
क्या भूमि और भवन के दस्तावेजों का मिलान किया गया?
क्या कक्षाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं का भौतिक सत्यापन हुआ?
निरीक्षण रिपोर्ट में भवन का कौन-सा पता दर्ज है?
वर्तमान में उसी पते पर नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नहीं?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
भवन को लेकर आरोप, जांच जरूरी
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि
जिस भवन को महाविद्यालय से जोड़ा जाता है,
उसकी वर्तमान स्थिति और उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पुरानी बिल्डिंग को दूसरे नाम से उपयोग किए जाने संबंधी आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि इन आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
जिला प्रशासन और संबंधित नियामक संस्था को मौके का स्वतंत्र भौतिक निरीक्षण, भवन के दस्तावेजों का सत्यापन और मान्यता के समय की निरीक्षण रिपोर्ट का मिलान करना चाहिए।
11 संस्थानों की जांच की मांग
मुद्दा केवल महर्षि महाविद्यालय तक सीमित नहीं है।
शिवपुरी जिले में संचालित डीएलएड और बीएड संस्थानों में सेकंड ईयर की कक्षाएं कब से संचालित हैं,
कितने विद्यार्थी नियमित रूप से उपस्थित हैं,
प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप कहां हो रही है तथा संबंधित संस्थानों में मान्यता के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी भी जांच की मांग उठ रही है।
यदि 11 संस्थानों में कहीं भी केवल कागजों पर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने,
बिना पर्याप्त सुविधाओं के प्रशिक्षण या दस्तावेजों में वास्तविक स्थिति से अंतर जैसी कोई बात जांच में सामने आती है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका नियमानुसार तय की जानी चाहिए।
प्रशासन से सीधे सवाल
शिवपुरी के सभी डीएलएड और बीएड संस्थानों में सेकंड ईयर की नियमित कक्षाएं कब से चल रही हैं?
प्रत्येक संस्था में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति कितनी है?
प्रैक्टिकल और शिक्षण-अभ्यास किस विद्यालय/परिसर में कराया जा रहा है?
महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटों के लिए वर्तमान शैक्षणिक परिसर कौन-सा है?
वर्ष 2026 की मान्यता/प्रवेश प्रक्रिया में किस स्तर पर भौतिक सत्यापन हुआ?
क्या निरीक्षण रिपोर्ट जिला प्रशासन के पास उपलब्ध है?
यदि किसी संस्था में मान्यता के अनुरूप सुविधाएं नहीं हैं तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
2026-27 के लिए NCTE प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित सूचनाएं और राउंड की जानकारी उपलब्ध है।
पोर्टल पर कॉलेज प्रोफाइल में कॉलेज, प्राचार्य, नोडल अधिकारी,
पाठ्यक्रम तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी से संबंधित प्रक्रियाएं भी दर्ज हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो PIL की ओर जाने की चेतावनी
विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में यदि शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के बावजूद प्रशासन स्तर पर जांच नहीं होती है,
शिकायतकर्ताओं द्वारा कानूनी उपाय और जनहित याचिका (PIL) का रास्ता अपनाने की बात कही जा रही है।
फिलहाल सबसे जरूरी मांग यही है कि आरोपों को सच या झूठ घोषित करने के बजाय दस्तावेजी जांच और मौके का वीडियोग्राफी सहित भौतिक सत्यापन कराया जाए।
यदि किसी अधिकारी या संस्था की लापरवाही, गलत दस्तावेज या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तभी जिम्मेदारी और संबंधित कानूनी/नियामकीय कार्रवाई तय की जानी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ महर्षि महाविद्यालय का नहीं है—सवाल उन विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और भविष्य का है, जिन्होंने डीएलएड में प्रवेश लेकर शिक्षक बनने की उम्मीद लगाई है।**
