दैनिक आचरण भोपाल
समाचार
शिवपुरी में D.El.Ed–B.Ed संस्थानों की मान्यता पर उठे गंभीर सवाल
भौतिक सत्यापन, भूमि और भवन की जांच हुई तो सामने आएगी पूरी हकीकत
शिवपुरी जिले में संचालित D.El.Ed और B.Ed संस्थानों को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल यह है कि जिन संस्थानों को मान्यता दी गई, उनके निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारियों ने वास्तविक भवन, उपलब्ध भूमि, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, छात्रावास तथा आवश्यक प्रशिक्षण सुविधाओं का कितना वास्तविक परीक्षण किया?
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के रिकॉर्ड में शिवपुरी जिले के कुछ शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों के पते, कार्यक्रम और स्वीकृत सीटों का विवरण उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, NCTE रिकॉर्ड में शिवपुरी स्थित कुछ संस्थानों के लिए D.El.Ed तथा B.Ed की मान्यता/सीटों का विवरण दर्ज है। �
NCTE +1
2026 के निरीक्षण पर सबसे बड़ा सवाल
यदि वर्ष 2026 में शिवपुरी जिले के लगभग 10 संस्थानों का निरीक्षण किया गया है, तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए—
निरीक्षण करने वाली टीम में कौन-कौन अधिकारी थे?
प्रत्येक अधिकारी ने मौके पर क्या पाया?
संस्थान के खसरा/भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन किस विभाग से कराया गया?
मान्यता के लिए निर्धारित भूमि और उपलब्ध भूमि में कोई अंतर था या नहीं?
भवन वास्तव में उसी स्थान पर मौजूद था या नहीं?
कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं मौके पर मिलीं या केवल दस्तावेजों में?
निरीक्षण रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दर्ज किए गए?
निरीक्षण के बाद मान्यता देने की अनुशंसा किस अधिकारी ने की?
सिर्फ कागजों पर सत्यापन पर्याप्त नहीं—शिक्षा संस्थान धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए।
ITI, ANM, GNM, हॉस्टल और अन्य पाठ्यक्रमों का भी परीक्षण जरूरी
यदि किसी परिसर में D.El.Ed/B.Ed के साथ ITI प्रशिक्षण केंद्र, ANM/GNM अथवा अन्य पाठ्यक्रम और हॉस्टल संचालित होने के दावे हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए संबंधित नियामक संस्था की अलग-अलग अनुमति और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।
जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रशासनिक सेवाओं और शिक्षा विभाग की जानकारी उपलब्ध है, जबकि NCTE की सूची से शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। �
Shivpuri District +1
क्या मिलीभगत हुई? जांच के बाद ही सच सामने आएगा
यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि सभी निरीक्षण अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया है। लेकिन यदि दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
इसलिए मांग उठती है कि जिला प्रशासन एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करे और 2026 में निरीक्षण किए गए सभी संस्थानों की रिपोर्ट, भूमि रिकॉर्ड और मान्यता संबंधी दस्तावेजों का मिलान कराए।
अभिभावकों के लिए जरूरी संदेश
बच्चों के भविष्य से समझौता न करें। किसी भी D.El.Ed/B.Ed संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता, संबद्धता, पाठ्यक्रम और वास्तविक परिसर की जानकारी संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से जरूर जांचें।
सवाल संस्थानों से ही नहीं, मान्यता और निरीक्षण प्रक्रिया से भी है—आखिर किसने क्या देखा और किस आधार पर मान्यता दी?
शिवपुरी में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए पूरी जांच जरूरी है।
