दैनिक आचरण भोपाल
सवाल
सत्र 2025-26 में छात्रों की इंटर्नशिप क्यों नहीं कराई गई? DIET प्राचार्य के बयान से व्यवस्था पर सवाल।
शिवपुरी। सत्र 2025-26 में महर्षि महाविद्यालय से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर इन विद्यार्थियों की इंटर्नशिप कहां कराई गई और यदि इंटर्नशिप नहीं हुई तो उनके शैक्षणिक भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है?
इस मामले में DIET शिवपुरी के प्राचार्य खान साहब से चर्चा की गई।
उनके अनुसार, DIET के माध्यम से महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी बताया कि निरीक्षण के दौरान महर्षि महाविद्यालय की बताई गई भौगोलिक स्थिति में कॉलेज का संचालन मौके पर स्थापित नहीं पाया गया।
📌 संभागीय कार्यालय के आदेश पर हुआ निरीक्षण
बताया गया कि संभागीय कार्यालय की ओर से DIET प्राचार्य को निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे।
प्राचार्य पर विभागीय कार्यभार अधिक होने के कारण उनके द्वारा एक टीम गठित कर शिवपुरी जिले के D.El.Ed कॉलेजों का निरीक्षण कराया गया।
निरीक्षण के बाद महर्षि महाविद्यालय को लेकर सामने आई स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि किसी संस्थान के विद्यार्थी वास्तव में अध्ययनरत थे, तो उनकी इंटर्नशिप, उपस्थिति, प्रशिक्षण और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जिम्मेदारी किस विभाग अथवा संस्था की थी?
❓ सबसे बड़ा सवाल—इंटर्नशिप नहीं हुई तो आगे क्या?
DIET प्राचार्य के अनुसार यदि महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने निर्धारित इंटर्नशिप नहीं की है, तो उन्हें आगे शैक्षणिक एवं दस्तावेजी स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने कई सवाल हैं—
सत्र 2025-26 में विद्यार्थियों की इंटर्नशिप कहां कराई गई?
इंटर्नशिप के लिए संबंधित विद्यालयों का चयन किसने किया?
विद्यार्थियों की उपस्थिति और प्रशिक्षण का रिकॉर्ड कहां है?
यदि कॉलेज मौके पर संचालित नहीं मिला तो विद्यार्थियों का प्रवेश और शैक्षणिक संचालन कैसे हुआ?
संबंधित रिकॉर्ड की जांच किस अधिकारी ने की?
मान्यता/संबद्धता देते समय संस्थान की वास्तविक भौगोलिक स्थिति का सत्यापन कैसे हुआ?
🔎 अब दस्तावेजों की जांच जरूरी
मामला केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है।
यदि विद्यार्थियों से फीस ली गई, प्रवेश दिया गया और उनकी पढ़ाई का रिकॉर्ड तैयार हुआ, तो इंटर्नशिप का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक और सत्यापित होना चाहिए।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रवेश रजिस्टर, उपस्थिति पंजिका, इंटर्नशिप आवंटन पत्र, संबंधित विद्यालयों के प्रमाण-पत्र और विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट की जांच के बाद ही हो सकती है।
छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब जिम्मेदार विभागों को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर सत्र 2025-26 के महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप का सच क्या है?
“छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो”
यदि इंटर्नशिप वास्तव में नहीं हुई और फिर भी रिकॉर्ड में विद्यार्थियों को इंटर्नशिप पूर्ण दर्शाया गया है, तो
यह बेहद गंभीर प्रशासनिक प्रश्न होगा।
दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
