दैनिक आचरण भोपाल
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महर्षि महाविद्यालय की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल, छात्राओं ने बताई कक्षाएं न लगने की बात।
शिवपुरी। जिला शिवपुरी में संचालित बताए जा रहे महर्षि महाविद्यालय को लेकर जमीनी स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2025 में महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाली कुछ छात्राओं से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उनसे फीस के नाम पर राशि ली गई, लेकिन उन्होंने एक भी दिन महाविद्यालय जाकर कक्षा में पढ़ाई नहीं की।
छात्राओं के अनुसार, महाविद्यालय में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हुईं और न ही किसी शिक्षक द्वारा उन्हें पढ़ाया गया। वहीं कुछ अन्य डीएलएड विद्यार्थियों ने भी बातचीत में बताया कि उनके महाविद्यालय में भी नियमित कक्षाएं नहीं लगीं।
प्रैक्टिकल को लेकर भी उठे सवाल
वर्ष 2025 में प्रैक्टिकल देने वाली कुछ छात्राओं ने बताया कि उन्हें कार्यालय से कॉपियां उपलब्ध कराई गईं और उन्हें घर ले जाकर लिखने के लिए कहा गया। सबसे गंभीर सवाल यह है कि प्रैक्टिकल लेने वाले शिक्षक अथवा परीक्षक कौन थे, इसकी जानकारी तक छात्राओं के पास नहीं होने की बात सामने आई है।
इन छात्राओं के बयान उपलब्ध होने का दावा भी किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि विद्यार्थियों की कक्षाएं नहीं लगीं और प्रैक्टिकल प्रक्रिया भी संदिग्ध बताई जा रही है, तो फिर उनकी पढ़ाई, उपस्थिति, प्रैक्टिकल और परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किए गए?
2026 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं भी सवालों के घेरे में
वर्ष 2026 में महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अब तक नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो रही हैं। मौके की स्थिति को लेकर लगातार निरीक्षण किए जाने और परिसर के बाहर से गतिविधियों पर नजर रखने की बात सामने आ रही है।
प्रशासन से सीधे सवाल
यदि विद्यार्थियों के आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। आखिर—
विद्यार्थियों से ली गई फीस के बदले नियमित कक्षाएं क्यों नहीं लगीं?
उपस्थिति रजिस्टर में विद्यार्थियों की उपस्थिति कैसे दर्ज हुई?
प्रैक्टिकल किसने लिए और किस स्थान पर लिए?
विद्यार्थियों को घर पर कॉपियां लिखने के लिए किसके निर्देश पर दी गईं?
निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों ने क्या पाया?
वर्ष 2026 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं क्यों नहीं हो रही हैं?
यह मामला केवल एक महाविद्यालय का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग को आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो महाविद्यालय प्रबंधन भी दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करे, और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
“कक्षाएं नहीं, पढ़ाई नहीं और फिर भी फीस व शैक्षणिक प्रक्रिया—आखिर यह व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है?”
