दैनिक आचरण भोपाल
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शिवपुरी महर्षि महाविद्यालय की मान्यता पर उठे गंभीर सवाल।
₹100 के स्टांप से लेकर निरीक्षण तक जांच की मांग।
शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय, शिवपुरी की डीएलएड मान्यता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध जानकारी और सामने आए ।
आरोपों के अनुसार संस्थान से जुड़े दस्तावेजों में ₹100 के स्टांप पेपर पर नोटरी कराए जाने की बात सामने आई है।
सवाल यह है कि मध्य प्रदेश का राजपत्र एक ही होने के बावजूद शिवपुरी जिले के डीएलएड/बीएड संस्थानों के पंजीकृत दस्तावेजों में अलग-अलग प्रक्रियाएं किस आधार पर अपनाई गईं?
यदि नियमों में कोई विशेष प्रावधान है तो प्रशासन को उसे सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल
महर्षि महाविद्यालय की भौतिक उपस्थिति और मान्यता को लेकर है।
आरोप लगाया जा रहा है ।
महर्षि महाविद्यालय डीएलएड संस्था जिस स्थान पर कागजों में दर्शाई गई,
वहां उसका वास्तविक संचालन अथवा आवश्यक अधोसंरचना स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर महाविद्यालय को मान्यता किस आधार पर प्रदान की गई?
क्या मान्यता देने से पहले संस्थान का स्थल निरीक्षण किया गया था या केवल दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया पूरी कर दी गई?
भोपाल से आए निरीक्षण दल पर भी सवाल।
मुख्य सवाल भोपाल से शिवपुरी आए निरीक्षण दल की कार्यप्रणाली को लेकर है।
यदि निरीक्षण दल ने वास्तव में महर्षि महाविद्यालय डीएलएड का भौतिक सत्यापन किया था, तो अधिकारियों ने मौके पर कक्षाएं, भवन, फर्नीचर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, स्टाफ, विद्यार्थियों की उपस्थिति, रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक संसाधनों में से क्या-क्या देखा?
निरीक्षण की रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं का उल्लेख होना चाहिए।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि
महर्षि महाविद्यालय डीएलएड को 50 सीटों के लिए पुनः मान्यता दी गई है।
आरोप यह भी है कि निरीक्षण के दौरान पुराने दस्तावेजों और पुराने फोटो को आधार बनाया गया।
यदि यह आरोप सही है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है,
क्योंकि किसी शैक्षणिक संस्था की वर्तमान मान्यता के लिए वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन होना आवश्यक है।
पुराने फोटो से वर्तमान मान्यता?
यदि पुराने फोटो और पुराने दस्तावेजों के आधार पर मान्यता दी गई है, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निरीक्षण की तारीख को संस्था की वास्तविक स्थिति क्या थी? क्या निरीक्षण दल ने प्रत्येक कमरे और आवश्यक सुविधा का मौके पर सत्यापन किया? क्या फोटो उसी समय लिए गए थे या पहले से उपलब्ध फोटो रिकॉर्ड का उपयोग किया गया?
इन आरोपों के चलते निरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत या आर्थिक लाभ लेने का आरोप अभी प्रमाणित नहीं है।
सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
मामला सामने आने के बावजूद प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने से सवाल और गहरे हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग एवं संबंधित मान्यता प्राधिकारी को महर्षि महाविद्यालय की मान्यता से जुड़े निरीक्षण प्रतिवेदन, स्थल सत्यापन रिपोर्ट, फोटो, भवन संबंधी दस्तावेज और मान्यता आदेश सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि महर्षि महाविद्यालय डीएलएड की धरातलीय स्थिति ही संदिग्ध थी,
तो 50 सीटों की मान्यता दोबारा किस आधार पर दी गई?
यदि संस्था सभी मानकों को पूरा करती थी, तो निरीक्षण दल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने में प्रशासन को क्या आपत्ति है?
मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मान्यता की प्रक्रिया नियमानुसार हुई या
इसमें किसी प्रकार की अनियमितता बरती गई।
