दैनिक आचरण भोपाल
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महर्षि महाविद्यालय पर छात्रवृत्ति और प्रैक्टिकल को लेकर बड़े सवाल।
नोडल अधिकारी को ही जानकारी नहीं, फिर 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति किसके आधार पर हुई स्वीकृत?
इंटर्नशिप नहीं हुई तो प्रैक्टिकल के अंक किसने दिए? धरातल पर संस्था नहीं, फिर सूची में कैसे दर्ज?
शिवपुरी। शिवपुरी जिले में संचालित बताए जा रहे महर्षि महाविद्यालय डीएलएड कॉलेज को लेकर छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल के संबंध में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि जिला स्तर पर संबंधित नोडल अधिकारी को संस्था की गतिविधियों, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल की जानकारी ही नहीं थी, तो विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुई और प्रैक्टिकल के अंक किस आधार पर दर्ज किए गए?
डायट शिवपुरी के प्राचार्य एम.के. शरीफ से चर्चा के दौरान उनके द्वारा कथित रूप से बताया गया कि वर्ष 2024 से महर्षि महाविद्यालय की भौतिक स्थिति/उपस्थिति को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप उनके माध्यम से नहीं कराई गई और न ही उनके द्वारा विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल कराए गए। यदि यह स्थिति सही है, तो यह जांच का गंभीर विषय बन जाता है।
नोडल अधिकारी से ही सवाल—फिर प्रैक्टिकल के अंक किसने दिए?
डीएलएड पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब संबंधित अधिकारी के अनुसार महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप नहीं कराई गई और प्रैक्टिकल भी उनके द्वारा नहीं कराए गए, तो विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल अंक किस अधिकारी, संस्था या व्यक्ति के माध्यम से दर्ज किए गए?
क्या इसके लिए कोई अधिकृत रिकॉर्ड तैयार किया गया था? क्या विद्यार्थियों की उपस्थिति, प्रैक्टिकल फाइल, इंटर्नशिप प्रमाण-पत्र और मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध है? यदि रिकॉर्ड मौजूद है तो उसकी जांच सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं की जाती?
धरातल पर संस्था नहीं तो सूची में नाम कैसे?
मामले में एक और गंभीर सवाल संस्था की भौतिक उपस्थिति को लेकर उठ रहा है। नोडल अधिकारी की ओर से कथित तौर पर यह बात सामने आई कि महर्षि महाविद्यालय धरातल पर दिखाई नहीं देता, जबकि संबंधित सूची में महर्षि महाविद्यालय का नाम दर्ज है।
ऐसे में प्रशासन के सामने सवाल है कि जिस संस्था की वास्तविक भौतिक स्थिति को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, उसका नाम सरकारी अथवा विभागीय सूची में किस आधार पर शामिल है?
क्या मान्यता देने से पहले संस्था का भौतिक सत्यापन हुआ था? क्या भवन, कक्ष, प्रयोगशाला, स्टाफ, विद्यार्थियों की उपस्थिति और अन्य निर्धारित सुविधाओं का मौके पर निरीक्षण किया गया था? यदि निरीक्षण हुआ था तो उसकी रिपोर्ट कहां है?
2024-25, 2025-26 की छात्रवृत्ति पर भी सवाल
सबसे महत्वपूर्ण मामला विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति को लेकर सामने आ रहा है। डायट प्राचार्य एम.के. शरीफ के अनुसार 2024-25 और 2025-26 की महर्षि महाविद्यालय की छात्रवृत्ति की फाइलों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उनके द्वारा छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं की गई।
यदि यह तथ्य विभागीय रिकॉर्ड से भी प्रमाणित होता है तो यह बड़ा प्रशासनिक सवाल है कि महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति किस अधिकारी ने सत्यापित की, किस स्तर से स्वीकृत हुई और राशि किस प्रक्रिया के तहत जारी हुई?
यह भी जांच का विषय है कि छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों की उपस्थिति, प्रवेश, फीस, परीक्षा, प्रैक्टिकल और संस्था की मान्यता से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
छात्रवृत्ति किसने निकाली—रिकॉर्ड सामने लाने की मांग
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नोडल अधिकारी ने छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं की और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी, तो छात्रवृत्ति की प्रक्रिया किसके माध्यम से पूरी हुई?
प्रशासन को चाहिए कि 2024-25, 2025-26 और संबंधित अवधि की छात्रवृत्ति फाइलों की जांच कर यह स्पष्ट करे कि आवेदन किसने सत्यापित किए, किस अधिकारी ने अनुमोदन किया, किस स्तर पर भुगतान आदेश जारी हुआ और विद्यार्थियों के खातों में राशि कब तथा किस प्रक्रिया से पहुंची।
जांच हुई तो कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर, शिक्षा विभाग और संबंधित छात्रवृत्ति अधिकारियों को महर्षि महाविद्यालय की मान्यता, भौतिक सत्यापन, प्रवेश रिकॉर्ड, इंटर्नशिप रिकॉर्ड, प्रैक्टिकल अंक, उपस्थिति रजिस्टर और 2024-25 व 2025-26 की छात्रवृत्ति फाइलों की जांच करनी चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि यदि संस्था धरातल पर संचालित नहीं थी तो विद्यार्थियों की पढ़ाई, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? और यदि संस्था नियमों के अनुसार संचालित थी तो उसके भौतिक संचालन के प्रमाण कहां हैं?
फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और विभागीय रिकॉर्ड से ही होगी, लेकिन नोडल अधिकारी की कथित जानकारी और छात्रवृत्ति रिकॉर्ड के बीच सामने आया अंतर पूरे मामले को गंभीर जांच के दायरे में लाता है। प्रशासन यदि पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड सामने रखे तो विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम जनता के बीच उठ रहे इन सवालों का जवाब मिल सकता है।