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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक के सीईओ को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार का जुर्माना।
हाईकोर्ट बोला-यह तुच्छ याचिका दायर कर,।
निलंबित कर्मचारी का अभ्यावेदन तय करने के सामान्य से आदेश पर रिव्यू में पहुंच जाना जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी को महंगा पड़ गया।
हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच ने बैंक की रिव्यू पिटीशन को खारिज करते हुए ।
फ्रिवोलस' करार दिया और
बैंक के सीईओ पर 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना ठोक दिया।
मप्र हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकलपीठ ने 24 सितंबर को यह आदेश पारित किया है।
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कर्मचारी ने इसलिए खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा।
बैंक प्रबंधन ने नवंबर 2025 में कर्मचारी उग्रसेन सिंह रघुवंशी को निलंबित कर दिया था।
रघुवंशी ने निलंबन के खिलाफ
शिवपुरी कलेक्टर, जो वर्तमान में बैंक के प्रशासक हैं, को 2 अप्रैल 2026 को अभ्यावेदन दिया था। आरोप है कि बैंक ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इस पर रघुवंशी ने हाईकोर्ट में डब्ल्यूपी 14037/2026 दायर की। हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को सिर्फ इतना कहा था कि 15 दिन में अभ्यावेदन का नियमानुसार निराकरण कर दें। यह आदेश इतना निर्दोष था कि इसमें बैंक के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी तक नहीं थी।
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हाईकोर्ट ने क्यों कहा, दुरुपयोग है
बैंक इस सामान्य आदेश को लेकर ही रिव्यू में पहुंच गया और दलील दी कि उसे सुने बिना आदेश हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि, जब कोर्ट ने सिर्फ अभ्यावेदन पर निर्णय लेने को कहा है, तो नोटिस जारी कर महीनों तक केस लटकाने की जरूरत ही नहीं थी। याचिकाकर्ता बैंक तो निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आदेश के खिलाफ रिव्यू लाना पूरी तरह तुच्छ और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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जेब से देना होगा जुर्माना
कोर्ट ने रिव्यू को 25 हजार के कास्ट के साथ खारिज करते हुए कहा कि यह राशि सीईओ को हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी ग्वालियर में 15 दिन में जमा करानी होगी। 15 दिन बाद कोर्ट अनुपालन रिपोर्ट देखेगी।
