दैनिक आचरण भोपाल
समाचार
नरवर में शासकीय जमीन पर मूंगफली मिलों का खेल? प्रशासन मौन क्यों, कार्रवाई कब होगी!
गरीबों को प्रधानमंत्री आवास के लिए संघर्ष, रसूखदारों पर करोड़ों की सरकारी जमीन पर कारोबार के आरोप।
नरवर। नगर परिषद नरवर क्षेत्र में शासकीय भूमि के कथित अतिक्रमण और उस पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि नगर परिषद क्षेत्र में कुछ स्थानों पर सरकारी भूमि पर कब्जा कर मूंगफली मिलों का संचालन किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय है और व्यावसायिक गतिविधि के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, तो लंबे समय से कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियम-कायदे आम नागरिकों के लिए अलग और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड में भूमि शासकीय दर्ज है और उस पर बिना वैधानिक अनुमति निर्माण अथवा व्यापार हो रहा है, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय है।
नगर परिषद अध्यक्ष के परिवार पर भी सवाल
मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप नगर परिषद अध्यक्ष के पद से जुड़े परिवार पर भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे के बाद वहां मूंगफली मिल का संचालन किया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक अनुमति तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
यह आरोप कितना सही है, इसका फैसला राजस्व रिकॉर्ड, स्थल निरीक्षण, नगर परिषद के दस्तावेज, भवन अनुमति, उद्योग संबंधी अनुमति तथा -नगर 4अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि संबंधित विभागों ने अब तक इन बिंदुओं की जांच क्यों नहीं की?
नरवर में शासकीय जमीन पर मूंगफली मिलों का खेल? प्रशासन मौन क्यों, कार्रवाई कब होगी
गरीबों को प्रधानमंत्री आवास के लिए संघर्ष, रसूखदारों पर करोड़ों की सरकारी जमीन पर कारोबार के आरो
नरवर। नगर परिषद नरवर क्षेत्र में शासकीय भूमि के कथित अतिक्रमण और उस पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि नगर परिषद क्षेत्र में कुछ स्थानों पर सरकारी भूमि पर कब्जा कर मूंगफली मिलों का संचालन किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय है और व्यावसायिक गतिविधि के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, तो लंबे समय से कार्रवाई क्यों नहीं हु
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियम-कायदे आम नागरिकों के लिए अलग और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड में भूमि शासकीय दर्ज है और उस पर बिना वैधानिक अनुमति निर्माण अथवा व्यापार हो रहा है, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय
नगर परिषद अध्यक्ष के परिवार पर भी सवाल
मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप नगर परिषद अध्यक्ष के पद से जुड़े परिवार पर भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे के बाद वहां मूंगफली मिल का संचालन किया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक अनुमति तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया ग
यह आरोप कितना सही है, इसका फैसला राजस्व रिकॉर्ड, स्थल निरीक्षण, नगर परिषद के दस्तावेज, भवन अनुमति, उद्योग संबंधी अनुमति तथा अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि संबंधित विभागों ने अब तक इन बिंदुओं की जांच क्यों नहीं की
यदि भूमि शासकीय निकलती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि उस भूमि पर कब्जा कब हुआ, निर्माण कब किया गया, किसकी अनुमति से व्यावसायिक गतिविधि शुरू हुई और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं
गरीब आवास के लिए परेशान, सरकारी जमीन पर कारोबार के आरो
एक तरफ गरीब परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए वर्षों तक दस्तावेज और स्वीकृति की प्रक्रिया में भटकते हैं। दूसरी तरफ यदि करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर प्रभावशाली लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, तो यह व्यवस्था की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता
आम नागरिक का सवाल है—क्या सरकारी जमीन पर अधिकार केवल इसलिए मजबूत हो जाता है क्योंकि कब्जा करने वाला व्यक्ति आर्थिक या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है
प्रशासन को इस सवाल का जवाब कार्रवाई और पारदर्शी जांच के माध्यम से देना चाहि
विधायक के पत्रों के बाद भी कार्रवाई पर स
मामले में करैरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक द्वारा जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को पत्र देकर शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। यदि जनप्रतिनिधि द्वारा बार-बार शिकायत अथवा पत्राचार किया गया है तो संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहि
सवाल यह भी है कि शिकायत मिलने के बाद क्या सीमांकन कराया गया? क्या मौके की वीडियोग्राफी हुई? क्या राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक कब्जे का मिलान किया गया? क्या नगर परिषद से भवन एवं व्यापार संबंधी अनुमति की जानकारी मांगी गई? यदि कार्रवाई हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की ग
मिलों से निकलने वाली गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी चिं
स्थानीय लोगों ने मिलों से निकलने वाली धूल, भूसे और अन्य अपशिष्ट सामग्री को लेकर भी चिंता जताई है। आरोप है कि आसपास के मकानों और छतों पर कई इंच तक भूसा अथवा कचरा जमा हो जाता है। इससे धूल और वायु प्रदूषण की समस्या पैदा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं
यदि यह स्थिति वास्तविक है तो स्वास्थ्य विभाग, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए लगातार धूल एवं कचरे का संपर्क चिंता का विषय हो सकता
स्वच्छ भारत का नारा तभी सार्थक होगा, जब औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरे के निपटारे की भी प्रभावी व्यवस्था हो।है।।ताई?ए।वालए।?है।पकी।?या।लहै।ई?प।! भूमि शासकीय निकलती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि उस भूमि पर कब्जा कब हुआ, निर्माण कब किया गया, किसकी अनुमति से व्यावसायिक गतिविधि शुरू हुई और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
गरीब आवास के लिए परेशान, सरकारी जमीन पर कारोबार के आरोप
एक तरफ गरीब परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए वर्षों तक दस्तावेज और स्वीकृति की प्रक्रिया में भटकते हैं। दूसरी तरफ यदि करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर प्रभावशाली लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, तो यह व्यवस्था की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
आम नागरिक का सवाल है—क्या सरकारी जमीन पर अधिकार केवल इसलिए मजबूत हो जाता है क्योंकि कब्जा करने वाला व्यक्ति आर्थिक या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है?
प्रशासन को इस सवाल का जवाब कार्रवाई और पारदर्शी जांच के माध्यम से देना चाहिए।
विधायक के पत्रों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
मामले में करैरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक द्वारा जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को पत्र देकर शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। यदि जनप्रतिनिधि द्वारा बार-बार शिकायत अथवा पत्राचार किया गया है तो संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सवाल यह भी है कि शिकायत मिलने के बाद क्या सीमांकन कराया गया? क्या मौके की वीडियोग्राफी हुई? क्या राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक कब्जे का मिलान किया गया? क्या नगर परिषद से भवन एवं व्यापार संबंधी अनुमति की जानकारी मांगी गई? यदि कार्रवाई हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
मिलों से निकलने वाली गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी चिंता
स्थानीय लोगों ने मिलों से निकलने वाली धूल, भूसे और अन्य अपशिष्ट सामग्री को लेकर भी चिंता जताई है। आरोप है कि आसपास के मकानों और छतों पर कई इंच तक भूसा अथवा कचरा जमा हो जाता है। इससे धूल और वायु प्रदूषण की समस्या पैदा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
यादि यह स्थिति वास्तविक है तो स्वास्थ्य विभाग, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए लगातार धूल एवं कचरे का संपर्क चिंता का विषय हो सकता है।
स्वच्छ भारत का नारा तभी सार्थक होगा, जब औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरे के निपटारे की भी प्रभावी व्यवस्था हो।

