दैनिक आचरण भोपाल
समाचार
शिवपुरी के निजी अस्पतालों की हो निष्पक्ष जांच, क्या हर अस्पताल में मानक के अनुसार डॉक्टर-नर्स और उपकरण उपलब्ध हैं?
शिवपुरी। जिले में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकल संस्थानों की व्यवस्थाओं को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जिले के प्रत्येक अस्पताल के पास वैध पंजीयन है, क्या वहां निर्धारित योग्यता वाले चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हैं तथा क्या मरीजों को भर्ती करने और उपचार देने के लिए आवश्यक सुविधाएं वास्तव में मौके पर मौजूद हैं?
मध्यप्रदेश के कानून के अनुसार नर्सिंग होम या क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट को पंजीयन और लाइसेंस के बिना संचालित नहीं किया जा सकता। कानून में पंजीयन के लिए भवन, स्टाफ, स्वच्छता, आवासीय व्यवस्था और आवश्यक उपकरण जैसी शर्तों का उल्लेख है। निरीक्षण का प्रावधान भी है। �
जांच में इन बिंदुओं की हो विशेष पड़ताल
प्रशासन को प्रत्येक अस्पताल की फाइलों के बजाय मौके पर भौतिक सत्यापन करना चाहिए—
अस्पताल का पंजीयन एवं लाइसेंस वैध है या नहीं।
जिस श्रेणी और जितने बेड की अनुमति है, वास्तव में उतने ही बेड हैं या नहीं।
अस्पताल में तैनात डॉक्टरों की डिग्री, पंजीयन और ड्यूटी रोस्टर।
क्या जिस विशेषज्ञ सेवा का दावा किया जा रहा है, उसके अनुरूप योग्य विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
नर्सिंग स्टाफ की योग्यता, पंजीयन और वास्तविक उपस्थिति।
24 घंटे की सेवा का दावा है तो रात के समय भी डॉक्टर/नर्सिंग स्टाफ मौजूद है या नहीं।
ऑक्सीजन, इमरजेंसी व्यवस्था, आवश्यक जीवनरक्षक उपकरण और बिजली का बैकअप।
ऑपरेशन थिएटर होने पर उसकी निर्धारित सुविधाएं और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था।
पैथोलॉजी/डायग्नोस्टिक सुविधा होने पर संबंधित पंजीयन और योग्य तकनीकी स्टाफ।
मरीजों के रिकॉर्ड, भर्ती-डिस्चार्ज रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेज।
बायोमेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निपटान।
स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और संक्रमण नियंत्रण।
अग्नि सुरक्षा संबंधी आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा व्यवस्था।
अस्पताल की इमारत एवं सुविधाएं उसके पंजीयन में दर्ज विवरण से मेल खाती हैं या नहीं।
जो मशीनें कागजों में दिखाई गई हैं, वे वास्तव में अस्पताल में मौजूद और चालू हालत में हैं या नहीं।
एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर भी उठे सवाल
हर अस्पताल के लिए डॉक्टरों की संख्या और विशेषज्ञता अस्पताल की श्रेणी, बेड क्षमता और दी जाने वाली सेवाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए बिना संबंधित श्रेणी के नियम देखे यह कहना सही नहीं होगा कि हर अस्पताल में एक निश्चित संख्या में MBBS डॉक्टर या नर्स अनिवार्य हैं।
लेकिन जहां अस्पताल 24 घंटे भर्ती मरीजों का उपचार करता है, वहां कानून में योग्य चिकित्सक और नर्सिंग व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। मध्यप्रदेश के संबंधित अधिनियम में नर्सिंग होम के लिए योग्य चिकित्सा व्यवसायी तथा योग्य नर्स की व्यवस्था का उल्लेख है। �
मान्यता आखिर कौन देता है?
मध्यप्रदेश में नर्सिंग होम/क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट के पंजीयन और लाइसेंस की व्यवस्था राज्य के संबंधित स्वास्थ्य प्रशासन के अंतर्गत है। कानून के अनुसार निर्धारित supervising authority शर्तें पूरी होने पर पंजीयन प्रमाणपत्र और लाइसेंस जारी करती है तथा निरीक्षण का भी प्रावधान है। �
भ्रष्टाचार की आशंका हो तो हो दस्तावेजों का मिलान
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी अस्पताल की फाइल में डॉक्टर, नर्स, मशीन और सुविधाएं दर्ज हैं, तो क्या निरीक्षण के दिन और सामान्य दिनों में भी वही व्यवस्था जमीन पर मौजूद रहती है?
यदि कागजों में डॉक्टर और कर्मचारी दिखाए गए हों, लेकिन मौके पर उपलब्ध न हों, मशीनें बंद हों या अस्पताल की वास्तविक स्थिति पंजीयन की शर्तों से अलग हो, तो यह गंभीर जांच का विषय होना चाहिए। बिना ठोस जांच के किसी अस्पताल या अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
प्रशासन से मांग
शिवपुरी जिले के सभी पंजीकृत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की अचानक और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच टीम अस्पताल की सूची बनाकर प्रत्येक संस्थान में डॉक्टरों की वास्तविक उपस्थिति, नर्सिंग स्टाफ, बेड, मशीनरी, अग्नि सुरक्षा, बायोमेडिकल वेस्ट, रिकॉर्ड और लाइसेंस का भौतिक सत्यापन करे।
सवाल यह नहीं कि कितने अस्पताल चल रहे हैं—सवाल यह है कि मरीजों की जिंदगी से जुड़े इन संस्थानों में कागजों पर दिखाई जा रही सुविधाएं वास्तव में जमीन पर कितनी मौजूद हैं?
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर ही यह साफ हो सकेगा कि शिवपुरी में स्वास्थ्य सेवाएं नियमों के अनुसार चल रही हैं या कहीं कागजी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार की गुंजाइश है।