जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी समाचार गरीब छात्राओं के भविष्य पर सवाल: महर्षि महाविद्यालय की सेकंडईयर की कक्षाएं कब लगेंगी? धरातल पर भवन नहीं, फिर परीक्षा और प्रशिक्षण कैसे? शिवपुरी। शिवपुरी जिले में संचालित बताए जा रहे महर्षि महाविद्यालय के डीएलएड फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल और परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार महाविद्यालय की 𝕤𝕖𝕔𝕠𝕟𝕕 𝕪𝕖𝕒𝕣 की कक्षाएं कब से नियमित रूप से लगेंगी, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, महाविद्यालय की बताई जा रही बिल्डिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और आरोप है कि मौके पर संस्था का भवन धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। सबसे बड़ा सवाल उन गरीब छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं, के भविष्य को लेकर है, डीएलएड में प्रवेश लिया और प्रशिक्षण के लिए कॉलेज पर भरोसा किया। यदि नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हुईं, प्रैक्टिकल नहीं कराए गए और विद्यार्थियों को वास्तविक प्रशिक्षण का अवसर नहीं मिला, तो उनके परीक्षा में बैठने और शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार होने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जानकारी के अनुसार भोपाल स्तर से भी महर्षि महाविद्यालय से संबंधित कई बिंदुओं को लेकर जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है जब कक्षाएं और प्रैक्टिकल व्यवस्था जांच के दायरे में हैं, तो विद्यार्थियों को परीक्षा की अनुमति किस आधार पर मिली? यदि विद्यार्थियों की कक्षाओं, प्रशिक्षण अथवा परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में किसी अन्य संस्था की भूमिका रही है, प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस आदेश और किस नियम के तहत यह व्यवस्था की गई। अब मामला केवल एक कॉलेज की कक्षाओं का नहीं रह गया है, बल्कि उन विद्यार्थियों के भविष्य का है जिन्होंने फीस देकर डीएलएड प्रशिक्षण में प्रवेश लिया है। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संस्था की मान्यता, भवन, कक्षाओं, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कब और किस अधिकारी ने किया। गांधी जी के आगे प्रशासन नतमस्तक है या नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी? यह सवाल भी अब उठने लगा है। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन दस्तावेज और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे। शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही का खामियाजा सबसे ज्यादा उन गरीब छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है, जिनके लिए डीएलएड सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि रोजगार और भविष्य की उम्मीद है।

0

न्यूज़ चाचा का धमाका 

जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 




गरीब छात्राओं के भविष्य पर सवाल: 

महर्षि महाविद्यालय की सेकंडईयर की कक्षाएं कब लगेंगी? धरातल पर भवन नहीं,फिर परीक्षा और प्रशिक्षण कैसे?

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में संचालित बताए जा रहे महर्षि महाविद्यालय के डीएलएड फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रैक्टिकल और परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार महाविद्यालय की 𝕤𝕖𝕔𝕠𝕟𝕕 𝕪𝕖𝕒𝕣 की कक्षाएं कब से नियमित रूप से लगेंगी, 

यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, 

महाविद्यालय की बताई जा रही बिल्डिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं 

और आरोप है कि मौके पर संस्था का भवन धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।

सबसे बड़ा सवाल उन गरीब छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं, के भविष्य को लेकर है, 

डीएलएड में प्रवेश लिया और प्रशिक्षण के लिए कॉलेज पर भरोसा किया। 

यदि नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हुईं, 

प्रैक्टिकल नहीं कराए गए 

और विद्यार्थियों को वास्तविक प्रशिक्षण का अवसर नहीं मिला, तो उनके परीक्षा में बैठने और शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार होने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जानकारी के अनुसार 

भोपाल स्तर से भी महर्षि महाविद्यालय से संबंधित कई बिंदुओं को लेकर जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है।

ऐसे में अब जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 

सवाल यह है

जब कक्षाएं और प्रैक्टिकल व्यवस्था जांच के दायरे में हैं, तो विद्यार्थियों को परीक्षा की अनुमति किस आधार पर मिली?

यदि विद्यार्थियों की कक्षाओं, प्रशिक्षण अथवा परीक्षा संबंधी प्रक्रिया में किसी अन्य संस्था की भूमिका रही है, 

प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस आदेश और किस नियम के तहत यह व्यवस्था की गई।

अब मामला केवल एक कॉलेज की कक्षाओं का नहीं रह गया है, बल्कि उन विद्यार्थियों के भविष्य का है 

जिन्होंने फीस देकर डीएलएड प्रशिक्षण में प्रवेश लिया है। 

प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संस्था की मान्यता, भवन, कक्षाओं, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कब और किस अधिकारी ने किया।

गांधी जी के आगे प्रशासन नतमस्तक है या नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी? 

यह सवाल भी अब उठने लगा है। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। 

वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन दस्तावेज और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे।

शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही का खामियाजा सबसे ज्यादा उन गरीब छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है,

जिनके लिए डीएलएड सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि रोजगार और भविष्य की उम्मीद है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

About Dainik Acharan News

Dainik Acharan News मध्य प्रदेश, शिवपुरी और देश-दुनिया की ताजा खबरों का हिंदी समाचार मंच है।