दैनिक आचरण भोपाल
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जिला शिवपुरी CM Rise School में अनियमितताओं का अंबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।
शिवपुरी। जिला शिवपुरी में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे
CM Rise School की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भवन में जगह-जगह दरारें दिखाई देने, दरवाजों सहित अन्य निर्माण कार्यों में खामियां होने और बच्चों के लिए खेल मैदान अब तक तैयार नहीं होने
जैसे आरोप सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल PIU के अधिकारियों की निरीक्षण व्यवस्था और निर्माण एजेंसी की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
आरोप है
करोड़ों रुपये की लागत वाले निर्माण कार्यों में यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण हुए थे,
वर्तमान में सामने आ रही खामियां कैसे बनीं?
वहीं, यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो भुगतान और कार्य की स्वीकृति किस आधार पर हुई?
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है
PIU के संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के बीच कथित मिलीभगत के कारण कहीं निर्माण की गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी आवश्यक है।
बिना जांच किसी अधिकारी या ठेकेदार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
करोड़ों के काम में जवाबदेही तय कौन करेगा?
सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर
अत्याधुनिक स्कूल भवन तैयार किए जा रहे हैं।
ऐसे में निर्माण कार्य में छोटी-सी तकनीकी कमी भी भविष्य में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।
भवन में दिखाई दे रही दरारों और अन्य कथित खामियों को देखते हुए
तकनीकी टीम से स्वतंत्र जांच, गुणवत्ता परीक्षण और निर्माण सामग्री की जांच कराए जाने की मांग उठ रही है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न
यह है कि निर्माण के दौरान किस अधिकारी ने कितनी बार साइट का निरीक्षण किया, कौन-कौन से माप पुस्तिका (MB) में दर्ज किए गए,
किस स्तर पर गुणवत्ता प्रमाणित की गई और भुगतान से पहले किन अधिकारियों ने कार्य का सत्यापन किया?
यदि दस्तावेजों में निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण दर्ज हैं,
तो मौके पर दिखाई दे रही
खामियों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
वहीं यदि आवश्यक निरीक्षण के बिना भुगतान हुआ है, तो यह पूरे निर्माण और भुगतान प्रक्रिया की गंभीर प्रशासनिक जांच का विषय बन सकता है।
अब निगाह प्रशासन पर है—
क्या CM Rise School के निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर PIU अधिकारियों, संबंधित ठेकेदार और भुगतान प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय की जाएगी,
या करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट पर उठ रहे
सवालों के बीच प्रशासन की चुप्पी जारी रहेगी?
