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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
जिला शिवपुरी में बन रहे सीएम राइस स्कूल के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, करोड़ों के काम में खेल मैदान गायब।
बच्चों के लिए बने बड़े स्कूल परिसर में खेल मैदान नहीं, निर्माण गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, जांच की मांग।
सीएम राइज स्कूल के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए भवन को लेकर अब कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस बड़े स्कूल भवन में विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर किए गए दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल
यह है कि इतने बड़े स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त खेल मैदान की व्यवस्था आखिर क्यों नहीं की गई?
अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है
स्कूल केवल कक्षाओं और भवन तक सीमित नहीं होना चाहिए।
विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए खेल मैदान और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी जरूरी हैं।
यदि निर्माण योजना और स्वीकृत प्रावधानों में खेल मैदान या उससे संबंधित कार्य शामिल थे,
इसकी मौके पर जांच की जानी चाहिए कि वह सुविधा कहां है और उसके लिए स्वीकृत राशि का क्या हुआ।
करोड़ों के बिल पास होने की प्रक्रिया पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है
जब भवन निर्माण में कई सुविधाओं को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं,
निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के करोड़ों रुपये के बिल किस आधार पर पास किए गए। क्या अधिकारियों ने भुगतान से पहले निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन किया था? यदि सत्यापन किया गया था तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
निर्माण की गुणवत्ता और खर्च का हो स्वतंत्र सत्यापन
मामले में आरोपों की पुष्टि के लिए निष्पक्ष तकनीकी जांच आवश्यक है।
भवन में इस्तेमाल सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शा, डीपीआर, टेंडर की शर्तें, किए गए कार्य और जारी भुगतान का मिलान कराया जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए
परियोजना में खेल मैदान सहित विद्यार्थियों के लिए निर्धारित सुविधाओं का प्रावधान क्या था।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रही नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से बने स्कूल भवन को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सभी कार्य नियमों के अनुसार हुए हैं तो संबंधित दस्तावेज और जांच रिपोर्ट सामने रखकर स्थिति साफ की जा सकती है।
अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसी या ठेकेदार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
