शिवपुरी के प्राइवेट D.El.Ed कॉलेजों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल, कथित अनियमितताओं की जांच की उठी मांग

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 


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शिवपुरी के प्राइवेट D.El.Ed कॉलेजों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल, कथित अनियमितताओं की जांच की उठी मांग

कागजों में कॉलेज, जमीन पर सवाल! कक्षाओं से लेकर इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल तक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल—विद्यार्थियों के भविष्य का जिम्मेदार कौन?

शिवपुरी। जिले के निजी D.El.Ed कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों की ओर से कथित अनियमितताओं, कक्षाओं के संचालन, इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निजी कॉलेजों को विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई है, तो क्या निर्धारित मापदंडों के अनुसार नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं? विद्यार्थियों को समय पर प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल का अवसर मिल रहा है या नहीं? इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित विभाग और कॉलेज प्रबंधन से मांगा जा रहा है।

D.El.Ed की पढ़ाई या कमाई का खेल?

निजी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर उठ रही शिकायतों में यह भी सवाल शामिल है कि कहीं शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित तो नहीं रह गई। आरोपों में कॉलेजों की व्यवस्थाओं, उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण गतिविधियों की वास्तविक स्थिति की जांच की मांग की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कक्षाएं, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल पर सवाल

D.El.Ed पाठ्यक्रम में नियमित अध्ययन के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप का महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे में यदि विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर कक्षाएं, प्रैक्टिकल अथवा इंटर्नशिप की सुविधा नहीं मिलती है, तो इसका सीधा असर उनके प्रशिक्षण और शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है। विद्यार्थियों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को कॉलेजों की जमीनी स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।

मान्यता से प्रशिक्षण तक जांच की मांग

कथित गड़बड़ियों को लेकर अब यह मांग उठ रही है कि जिले के सभी संबंधित निजी D.El.Ed कॉलेजों की मान्यता, भवन एवं आधारभूत सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, छात्र उपस्थिति, कक्षा संचालन, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप तथा अन्य निर्धारित मापदंडों की जांच की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल

सबसे अहम प्रश्न प्रशासनिक निगरानी को लेकर है। यदि नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और सत्यापन कितना प्रभावी है? क्या केवल दस्तावेजों के आधार पर व्यवस्थाओं को सही मान लिया जाता है या कॉलेजों की वास्तविक स्थिति भी जांची जाती है?

विद्यार्थियों के भविष्य का कौन देगा जवाब?

D.El.Ed करने वाले विद्यार्थी शिक्षक बनने की तैयारी के लिए इन संस्थानों पर भरोसा करते हैं। इसलिए उनकी फीस, समय और भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की मांग है कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित शिक्षा विभाग इन आरोपों और शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निजी D.El.Ed कॉलेजों की वास्तविक शैक्षणिक व्यवस्था की जमीनी जांच कराई जाती है। फिलहाल “कागजों में कॉलेज, जमीन पर सवाल” का मुद्दा चर्चा में है और जवाब का इंतजार विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी है।

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