दैनिक आचरण भोपाल
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बदहाल शिवपुरी विधानसभा सड़कें नहीं , परेशान है लोग।
शिवपुरी। माधव महाराज ने जिसे सात तालाबों की नगरी के रूप में संवारा था, आज वही शिवपुरी अपनी ही सड़कों पर घुटने टेक रही है।
सीवर का गंदा पानी, दलदल बने 39 वार्ड, भूमाफिया की भेंट चढ़ते तालाब ।
20 से 40 फीसदी कमीशन का खेल।
शनिवार को होटल मातोश्री पैलेस में शिवपुरी का यही अजीबो गरीबों का सच सामने आया।
एडीएम दिनेश चंद शुक्ला और नगर पालिका सीएमओ यशवंत राठौर थे,
सामने शहर का हर वर्ग व्यापारी, युवा, पत्रकार, कवि, अधिवक्ता, बुजुर्ग और समाजसेवी।
सवाल एक ही था - आखिर शिवपुरी की सुंदरता को बदहाली का दाग किसने लगाया और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रशासन ने माना कि समस्या गंभीर है और अब वार्ड-वार जिम्मेदारी तय कर बोर्ड लगाने से लेकर अतिक्रमण हटाने और जलनिकासी सुधारने तक ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनसंवाद से निकले 5 बड़े सवाल
1 सड़कें नहीं, गड्ढे: पेंचवर्क तक नहीं हो रहा।
2 जलभराव: नाले बंद, कॉलोनियों में नर्क जैसे हालात। 3.
अतिक्रमण: हटाओ तो दूसरे दिन फिर वहीं।
4 सात तालाबों का अस्तित्व खतरे में: गंदगी और भूमाफिया। 5 जवाबदेही का संकट: काम कौन कर रहा है, किससे शिकायत करें पता ही नहीं।
प्रशासन ने क्या भरोसा दिया?
एडीएम दिनेश चंद शुक्ला: "यह मंच सिर्फ सुनने के लिए नहीं है। जो सुझाव आए हैं, उन पर पूरा फोकस रहेगा।
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई लगातार जारी है। संवाद से ही समाधान निकलेगा, विकास के लिए सबको साथ चलना होगा।"
सीएमओ यशवंत राठौर: "मानता हूं, समस्या है। पीएस होटल और माधव नगर की सड़क और जलभराव की समस्या प्राथमिकता पर खत्म करेंगे। अतिक्रमण हम हटाते हैं, पर जनसहयोग के बिना फिर लग जाता है। अब हर वार्ड में बोर्ड लगेगा, जिस पर संबंधित इंजीनियर और कर्मचारी का नाम-मोबाइल नंबर होगा।"
यातायात प्रभारी रणवीर यादव: "संसाधन कम हैं। सिग्नल जनसहयोग से लगे थे, खराब हो गए हैं, सुधरवाएंगे। ठेले वालों को हटाते हैं, गरीब समझकर चालान नहीं करते, पर वे लौट आते हैं।"
मंच से उठी जनता की आवाज - किसने क्या कहा
राहुल व्यास: राजनीति छोड़कर शहर देखो। सिग्नल खराब हैं, ट्रैफिक भगवान भरोसे।
काजल सिकरवार: बारिश आते ही माधवनगर का बुरा हाल हो जाता है। जल निकासी की कोई प्लानिंग ही नहीं।
मणिका शर्मा (पत्रकार): सड़क नहीं बना सकते तो पेंचवर्क ही करा दो। खुले सीवर मौत को दावत दे रहे हैं, गोवंश सड़कों पर भटक रहा है।
आशुतोष शर्मा (कवि): सबसे बड़ा हमला किया। बोले - शिवपुरी को माधव महाराज ने बसाया, भूमाफियाओं ने सात तालाब निगल लिए। ठेकेदार खुद कहते हैं 15-20% कमीशन देना पड़ता है, तो सड़क बनेगी कैसे?
पुनीत शर्मा (व्यापारी): पूंजीपतियों ने अतिक्रमण बढ़ाया है। जनता को सिर्फ रोटी-कपड़ा नहीं, बिजली-पानी-सड़क-स्वच्छता चाहिए।
अभिनंदन जैन: सबसे प्रैक्टिकल सुझाव। कहा - अच्छी बातों से गड्ढे नहीं भरते। हर वार्ड में बोर्ड लगाओ, लिखो - यह सड़क किस ठेकेदार की है, जिम्मेदार अधिकारी कौन है।
महेंद्र समाधिया: "साहब, एक बार पीएस होटल के पीछे छात्रावास आकर देखो, नर्क है। पार्षद कहता है सरकारी रोड है, नपा कहती है हमारी नहीं। जाएं तो कहां जाएं?"
अनिल शर्मा: जब से सीवर प्रोजेक्ट आया, भ्रष्टाचार बढ़ा है। मोहनी सागर जैसे पर्यटन स्थल पर गंदगी है।
रोहिताश नायक (वार्ड 38): खाली प्लाटों में गंदा पानी सड़ रहा है, मच्छर पनप रहे हैं। ऐसे प्लाट मालिकों पर जुर्माना लगना चाहिए।
