शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय को लेकर एक बार फिर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि महाविद्यालय में D.El.Ed सेकंड ईयर की कक्षाएं अब तक नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं,

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 दैनिक आचरण भोपाल 

समाचार 

शिवपुरी के महर्षि महाविद्यालय पर बड़ा सवाल: D.El.Ed सेकंड ईयर की कक्षाएं अब तक क्यों नहीं? 50 छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण आखिर कहां होगा?

शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय को लेकर एक बार फिर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि महाविद्यालय में D.El.Ed सेकंड ईयर की कक्षाएं अब तक नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं,




जबकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र आगे बढ़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि महर्षि महाविद्यालय की वास्तविक भौतिक स्थिति और संचालन स्थल को लेकर ही स्थिति स्पष्ट नहीं है,

यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की पढ़ाई, प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल और उपस्थिति किस स्थान पर कराई जा रही है?

कहां है महर्षि महाविद्यालय?

महर्षि महाविद्यालय को लेकर लंबे समय से उसकी वास्तविक लोकेशन और भवन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि मौके पर महाविद्यालय की स्थिति स्पष्ट नहीं है तो D.El.Ed के विद्यार्थियों की कक्षाएं आखिर किस भवन में लगाई जा रही हैं?

विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि जिस संस्था में उन्हें शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करना है, वहां पर्याप्त भवन, कक्षाएं, शिक्षक और प्रशिक्षण की व्यवस्था वास्तव में मौजूद है या नहीं।

50 छात्र-छात्राओं के भविष्य पर सवाल।

बताया जा रहा है कि सत्र 2026 में महर्षि महाविद्यालय में लगभग 50 छात्र-छात्राओं के प्रवेश की जानकारी सामने आई है। यदि यह संख्या सही है तो इन विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाएं, विषयवार अध्यापन, प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की व्यवस्था होना जरूरी है।

लेकिन सवाल उठता है कि इन 50 विद्यार्थियों की कक्षाएं कहां लग रही हैं? कौन शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे हैं? शिक्षक महाविद्यालय में किस स्थान पर उपलब्ध हैं? विद्यार्थियों की उपस्थिति किस भवन में दर्ज की जा रही है?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और महाविद्यालय प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

टीचरों का भी पता नहीं, तो पढ़ाई कैसे?

शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए योग्य शिक्षकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि महाविद्यालय के शिक्षकों की उपस्थिति और उनकी नियुक्ति को लेकर ही स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो विद्यार्थियों को प्रशिक्षण किस प्रकार दिया जा रहा है, यह जांच का विषय बन जाता है।

प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि महर्षि महाविद्यालय में वर्तमान में कितने शिक्षक नियुक्त हैं, उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है, वे किस विषय का अध्यापन कर रहे हैं और उनकी नियमित उपस्थिति किस स्थान पर दर्ज होती है।

मान्यता की जांच पर भी उठ रहे सवाल।

सबसे गंभीर सवाल महाविद्यालय की 2026 की नवीन मान्यता को लेकर उठ रहा है। यदि संस्था को मान्यता देने से पहले निरीक्षण किया गया था तो निरीक्षण दल में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे? अधिकारियों ने महाविद्यालय की भौतिक स्थिति का निरीक्षण किस तारीख को किया? भवन में कितने कमरे पाए गए? कितने शिक्षक मौके पर मिले? विद्यार्थियों के प्रशिक्षण की क्या व्यवस्था पाई गई?

यदि इन सभी बिंदुओं की जांच हुई थी तो उसकी निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?

प्रशासन से सीधा सवाल—निरीक्षण हुआ या सिर्फ कागजों में?

शिक्षा विभाग और प्रशासन के सामने कई सवाल हैं—

महर्षि महाविद्यालय का वर्तमान संचालन स्थल कौन-सा है?

D.El.Ed सेकंड ईयर की कक्षाएं किस भवन में लग रही हैं?

सत्र 2026 के 50 विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई कहां हो रही है?

महाविद्यालय में वर्तमान में कितने शिक्षक कार्यरत हैं?

शिक्षकों की उपस्थिति किस रजिस्टर में दर्ज होती है?

विद्यार्थियों की उपस्थिति किस स्थान पर लगाई जा रही है?

2026 की मान्यता के लिए किस अधिकारी या निरीक्षण दल ने भौतिक सत्यापन किया?

निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय का भवन और कक्षाएं मौके पर उपलब्ध थीं या नहीं?

विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल और प्रशिक्षण की व्यवस्था कहां की गई है?

यदि महाविद्यालय का संचालन स्थल स्पष्ट नहीं है तो मान्यता किस आधार पर दी गई?

क्या प्रशासन की मिलीभगत है?

महर्षि महाविद्यालय को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हालांकि किसी अधिकारी या संस्था पर रिश्वत अथवा मिलीभगत का आरोप बिना जांच के सिद्ध नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक कोई स्पष्ट जांच या कार्रवाई नहीं होती है तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि संस्था को मान्यता देने और उसके संचालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी और उन्होंने नियमों के अनुसार क्या कार्रवाई की।

विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर है। D.El.Ed ऐसा पाठ्यक्रम है जिसमें केवल प्रवेश लेना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं, विषयवार अध्यापन, प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और निर्धारित शैक्षणिक गतिविधियों से गुजरना होता है।

यदि किसी संस्था में यह व्यवस्था नहीं है तो उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ सकता है। इसलिए जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए।

शिवपुरी के अन्य D.El.Ed महाविद्यालय भी जांच के घेरे में क्यों नहीं?

मामला केवल एक महाविद्यालय तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आ रही है। जिले में संचालित अन्य D.El.Ed संस्थाओं की भी भौतिक स्थिति, मान्यता, भवन, शिक्षक, छात्र संख्या, कक्षाएं, प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है।

यदि शासन और प्रशासन वास्तव में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है तो शिवपुरी जिले के सभी संबंधित महाविद्यालयों का एक समान मापदंड पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग।

महर्षि महाविद्यालय से संबंधित मान्यता आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, भवन संबंधी दस्तावेज, शिक्षक सूची, छात्र प्रवेश सूची, कक्षाओं का टाइम-टेबल, उपस्थिति रिकॉर्ड और प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

यदि संस्था नियमों के अनुसार संचालित हो रही है तो दस्तावेज सामने आने से सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा। यदि कहीं अनियमितता है तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

शासन से मांग—जांच हो, जवाब मिले।

अब शासन और जिला प्रशासन से मांग है कि महर्षि महाविद्यालय की निष्पक्ष एवं भौतिक जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाए कि वर्तमान में महाविद्यालय वास्तव में कहां संचालित है, D.El.Ed सेकंड ईयर की कक्षाएं कहां लग रही हैं, 50 विद्यार्थियों का प्रशिक्षण किस स्थान पर हो रहा है और शिक्षकों की वास्तविक स्थिति क्या है।

साथ ही 2026 की मान्यता से संबंधित पूरी प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।

यदि शासन स्तर से इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और कार्रवाई नहीं होती है तो जिले के अन्य 11 महाविद्यालयों की भी दस्तावेजी एवं भौतिक जांच की मांग को लेकर अभियान चलाने की तैयारी की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब महाविद्यालय का संचालन स्थल, कक्षाएं, शिक्षक और प्रशिक्षण व्यवस्था ही स्पष्ट नहीं है, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई आखिर कहां हो रही है? अब जवाब महर्षि महाविद्यालय प्रबंधन ही नहीं, बल्कि संबंधित विभाग और प्रशासन को भी देना होगा।

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